छणिकाएँ

 



सरकार, 
भ्रष्टाचार को
भगवान का दर्जा
देने पर आमादा
धुआं उठा नहीं
कि फायर ब्रिगेड 
हुशियार...
जांच के पहले ही
क्लीन चिट देने की 
कवायद में,
सारे असुर, पूरी बेशर्मी से 
तैयार...


पद और कद में
सांप नेवले जैसा प्यार...
जहां पद है, कद नहीं
जहां कद है
वहां पद का
चातकी इंतजार।


ईमानदार लोग
अब कहां देश में
.......सब संसद में।
द्वापर से कलियुग तक, 
आर्यावृत हमेशा ही
सत्ता लोलुप
मक्कार दुर्योधन
जयचंद, मानसिंह
मीरजाफरों के
षडयंत्र का शिकार...
यह हमारा दुर्भाग्य ही है
कि हर बार 
ऐरावत की पीठ पर
रंगे सियार ही
सवार...!


वे बोले,
बड़ी अजीब बात है
बावजूद सारी चैकसी,
बयान, आश्वासनों के
बलात्कारियों द्वारा
सामुहिक दुष्कर्म-हत्यायें
जारी हैं...
हमने कहा-यह कोई
अजीब बात नहीं है
बलात्कारियों का अस्तित्व
तो अब,
नपुंसक सरकार भी 
स्वीकारती है
देखना बस यही है
कि अब आगे
किसकी बारी है..।


घर मे राम का शक
बाहर रावण का डर...
कहां जाये औरत
वह तो जन्म से ही
बेसहारा, बेघर...।


हिन्दी बेचारी,
मां को, 
मां कहने में भी
पुत्रों की लाचारी। 
उफ, 
दावानल की तरह
चारों तरफ
फन काढ़ती मंहगाई,
अब कहां जाये जनता
उसके लिये तो
एक ओर कुआं
दूसरी ओर खाई।


गठबंधन सरकार
जनता के प्रति नहीं
सत्ता साझीदारों के प्रति
वफादार...
कुर्सी की मजबूरी भी
क्या मजबूरी
अपने बच्चों को छोड़
सौतन के बच्चों से प्यार!


गणेश तुम 
अनादि काल से
गणेश थे
बुद्धिदाता, बिघ्न विनाशक
गणेश ही रहे
और हम दिन-रात
पीढ़ी दर पीढ़ी
पूजा-अर्चना के बाद भी
गोबर से
गोबर गणेश 
होते चले गये।