ग्रीष्म ऋतु


(वक्रतुण्डोपनिषद )


दहके गंगलोढ़े गालों पर
श्वेद बूंद का अलंकार
मुख पर सोयी पूरणमासी
नींद/ श्रम का पुरस्कार


वंचित, साधनहीन, विवश
संताप-ताप स्वीकार करें
अनंग-पत्रिका, ग्रीष्म ऋतु की
पढ़ने का प्रयास करें


द्विविधा पैदा क्यों करते हो
सुविधा बन क्यों आते हो?
क्षुधा, रोग, लू, गण के हिस्से
गणपति भी कहलाते हो