कैसे पहचाने पितृदोष (ज्योतिष -२ )


पित्र दोष की पहचान - जिन घरों में पित्र दोष होता है ,ऐंसे घरों चाहे चार सदस्य ही क्यूँ न हों उनमे मनमुटाव रहते हैं | उनके विचारों मे कोई तालमेल नहीं होता ,पति पत्नी मे आपस मे नही बनती | कई बार ऐसे देखने को मिला है पति या पत्नी मे किसी एक का देहांत बहुत कम उम्र मे हो जाता है | ऐसे घरों की संतानो की शादी या तो देर मे होती है या शादी के कुछ ही महीनों मे ही उनका तलाक हो जाता है | वास्तु के हिसाब से जब भी इन घरों में प्रवेश करते हैं एक अजीब सी गंध हमेशा यहाँ महसूस होती है | ज्योतिष होने के नाते अपने निजी अनुभवों से आपको ये बताना चाहती हूँ , कई बार मैने ऐसी कुंण्डलियाँ देखी हैं |जिनमे बड़े राजयोग होते हैं पर जिसकी कुंण्डली मे ऐसे योग को देखती हूँ उस व्यक्ति की स्थिती इतनी अच्छी देखने को नहीं मिलती जितनी मैं उस कुंडली मे देखती हूँ | पछने पर पता लगता है व्यक्ति सब कुछ करता है ,नित्य पूजा पाठ ,अपने पित्रों के निमित तर्पण और श्राद्ध ,हर महीने अपने कुल देवता के दर्शन करने जाता है | जैंसा एक संस्कारवान व्यक्ति करता है ,पर ये सब करने पर भी परेशानियां पीछा नहीं छोड़ती | ज्योतिष हूँ इसलिये थोड़ा अनुमान तो लग ही जाता है कि ऐसा क्या हो सकता है कि कोई इतना परेशान हो | जब उसी व्यक्ति की संतान की कुंडली देखती हूँ ,उसमे जन्म से ही पित्र दोष देखने को मिलता है | ऐसा अक्सर तभी होता है जब माता -पिता द्वारा भ्रूण हत्या की जाती है | ऐसा पाप कर्म संतान की कुंडली मे जन्म से ही पित्र दोष का निर्माण करता है | भ्रूण हत्या से पित्र दोष ही नही आने वाली सात पीड़ियों पर ब्रह्म हत्या का पाप लग जाता है | जिन लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है उनके लिए ये एक मामूली सी बात है |पर ये मामूली बात नहीं है ,इसका दंड प्रकृति भी अपना विकराल रुप लेकर प्राक्रतिक आपदाओं के रुप मे देती है |प्रकृति को भी अपना संतुलन बनाये रखना होता है |