प्यार की हवायें


प्यार की हवायें आती हैं हौले हौले,
मन पर छा जाती है गहरे
झटका देती है तूफानों सा
इन झटकों से खुद को 
बचाये रखना। प्रेम की काया
टिकती विश्वास सहारे
बिन घी जले न बाती
जीवन दीप अनमोल
स्निग्घता का तेल बनाये रखना।
पहरे लगते रहे हैं प्यार पर
अपने ही अपनों के हो जाते है दुश्मन
रसधार का प्रवाह बनाये रखना।
अपनों ने किया घायल, 
सहलाना घावों को
गहरे न हो जायें जख्म, 
आशा का लगाना मरहम।
मिलेगा मीत का मिलन मधुरस
नहीं छुपाना कुछ सरल सहज होगा जीना
सच को सच कहने की हिम्मत बनाये रखना
काट छाँट कर छोटी न करो चादर प्रेम की
अजब कौशल है इस चादर में
बाँटी जितनी उतनी बढ़ी 
मर्यादा में गूंथ कर इसके धागों को 
सुदृढ़ आधार बनाये रखना।
मात पिता है निश्चल मन की धारा
ठेस लगे न उन्होंने हम पर जीवन वारा
उनका जीवन देने का ऋण भारी
उन्हें सम्मान का हार पहनाये रखना।
सबसे ऊँचा है मानव धर्म
कठिन किंतु गृहस्थी का सेवाधर्म
इस धर्म की आब निभाये रखना।
अक्षम्य होंगे अपराध
अपराध करके भी यदि चुप रहे
सत्य का सामना करने के लिये
अंगारों की बरसात में भी
धर्म का साथ निभाये रखना। 
आशा का दामन न छोटा कर
कभी तो रात आयेगी पाप के पछतावे की
घाव देने वाले मन से भी निकलें दुआयें
लेकर सदायें उस सौगात को 
पाने की हिम्मत बचाये रखना।
बड़े नाजुक होते हैं जीवन के रिश्ते
रिश्तों में ही उतर आते फरिश्ते
दर्पण विश्वास का न तनिक दरके।
न मिटना, संभलना और संभालाना
रिश्ते की आब बनाये रखना
संवाद सिलसिला चलाये रखना