!!पर्यावरण एवं प्रकृति का लोक पर्व हरेला!!

 

देवभूमि उत्तराखंड का पर्यावरण,प्रकृति और जलवायु का महापर्व हरेला कृषि परम्परा से जुड़ा पर्व उत्तराखंड ही नहीं,दुनिया में अपनी अनोखी छाप छोड़ चुका है। पर्यावरण को सुरक्षित रखने एवं प्रदूषण मुक्त भारत का संकल्प पर्यावरण एवं प्रकृति का लोक पर्व हरेला के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तराखंड के पूर्व प्रांत प्रचारक डॉक्टर हरीश रौतेला ने लिया था।

पर्यावरण विद,प्रकृति प्रेमी डाक्टर हरीश रौतेला जी ने उत्तराखंड में विभिन्न स्तरों में प्रचारक रहते हुए इस पर्यावरण प्रकृति महोत्सव को देवभूमि उत्तराखंड के प्रत्येक घर परिवार, खेत खलिहान, स्कूल, कॉलेज और अस्पताल सहित सभी सरकारी, गैरसरकारी संस्थानों में एक पौधा अपने व अपने परिवार के स्वस्थ एवं सुखी जीवन जीने का आधार का संकल्प लिया था। जिससे,पर्यावरण व प्रकृति की रक्षा की जा सके। उस समय उत्तराखंड में कांग्रेस नीत हरीश रावत की सरकार ने इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कई सरकारी व गैर-सरकारी कार्यक्रम वृक्षारोपण के रुप में लिए। उसी के फलस्वरूप आज उत्तराखंड में ही नहीं, अपितु देश के हर राज्य में पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए हरेला महोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है।

आनलाक-2 के प्रतिबंधों में विद्यालय के भैया-बहिन लम्बे समय से अपने अभिभावकों के संरक्षण में अपने घरों पर हैं। वासुदेव लाल मैथिल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज ब्रह्मपुर, रुड़की हरिद्वार ने हरेला कुंभ महोत्सव को व्यापकता प्रदान करने के लिए 13 जुलाई से 20 जुलाई तक पर्यावरण जन जागरूकता सप्ताह में वृहद स्तर पर वृक्षारोपण करने के उद्देश्य से प्रत्येक भैया-बहिन " मेरा आंगन मेरा पौधा" के तहत एक हजार पौधे लगाने की है। विद्यालय परिवार ने इस अभियान को विद्यालय के छात्रों द्वारा अपने अभिभावकों के साथ पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण करने की शुरुआत की है। विद्यालय परिवार ने इस बार 30 गांव में 1000 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है, जिससे इस अभियान में सभी भैया-बहिन अपने अभिभावकों के साथ अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सुनिश्चित करेंगे।

पर्यावरण प्रकृति जलवायु रूपी इस महापर्व हरेला के अभियान निरंतर बढ़ता रहे।  

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर जी की जन्मशताब्दी वर्ष में राज्य स्तर पर लिए गये छः कार्यक्रमों में वृक्षारोपण को प्रमुखता दी थी। डाक्टर हरीश रौतेला जी की प्रेरणा से आज भारतवर्ष के सभी प्रांतो में हरेला या यूं कहें कि पर्यावरण प्रकृति पर्व को एक नई पहचान मिली है।

पर्यावरण एवं प्रकृति का लोक पर्व हरेला को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए इस अभियान में लगे हैं। इस बार बरगद, तुलसी, बेलपत्र, आंवला, जामुन और आम आदि के पौधे लगाकर पर्यावरण प्रकृति पर्व को हरियाली युक्त बनायेंगे।  पर्यावरण, जलवायु प्रकृति हरेला कुंभ महापर्व जन जागरूकता सप्ताह 13 जुलाई से 20 जुलाई तक पर्यावरण मेला के रूप में मनाया जाएगा।